Reservation In Promotion Case In Uttarakhand : Allegation Caste Organizations Spreading Disharmony – प्रमोशन में आरक्षण : जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन पर बोला हमला, कहा ‘वैमनस्यता फैला रहे जातिगत संगठन’

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राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद और उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन ने उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन पर हमला बोला है। दोनों संगठनों ने कहा कि जातिगत आधार पर बने संगठन कर्मचारियों में वैमनस्यता फैला रहे हैं। दोनों संगठनों ने एसोसिएशन पर मीडिया में भ्रम फैलाने और अनर्गल बयानबाजी करने का आरोप जड़ा है।

उन्होंने कटाक्ष किया कि जो संगठन शासन से मान्यता प्राप्त नहीं है, उसे दूसरों सलाह देने का कोई अधिकार नहीं है। परिषद ने अपने सभी पदाधिकारियों व सदस्यों को ताकीद किया कि वे तत्काल प्रभाव से एसोसिएशन की सदस्यता छोड़ें अन्यथा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

साथ निर्णय लिया कि कहीं यदि इक्का दुक्का पदाधिकारी परिषद से त्यागपत्र दे रहे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर उनके स्थान पर दूसरे पदाधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। साथ मुख्यमंत्री से जातिगत आधार बने कर्मचारी संगठनों की मान्यता समाप्त करने और उन्हें प्रतिबंधित करने की मांग की गई। कहा गया कि ये संगठन कर्मचारियों के मध्य वैमनस्यता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।

शुक्रवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की हाईपावर कोर कमेटी की बैठक हुई। विकास भवन में हुई इस बैठक के निशाने पर एसोसिएशन थी। बैठक में एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक जोशी के
उस बयान पर नाराजगी जाहिर की जिसमें उन्होंने रिटायर कर्मचारी और परिषद की मान्यता रद करने की बात कही है। ठाकुर प्रहलाद सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि किसी भी ऐसे संगठन को सलाह देने का हक नहीं जो खुद मान्यता प्राप्त नहीं है।परिषद के अध्यक्ष को सदन ने चुनाकार्मिक विभाग के अनुरूप कार्यकारी अध्यक्ष व कार्यकारी महामंत्री भी सदन की सहमति से ही बने हैं। प्रमोशन में आरक्षण लागू कराने के बारे में कहा गया कि जो लोग आज मीडिया में श्रेय ले रहे हैं और खुद सर्वेसर्वा मान बैठे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि मुख्यमंत्री तो वार्ता को तैयार नहीं थे। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को परिषद व अन्य मान्यता प्राप्त महासंघों व संघों के सदस्यों व पदाधिकारियों के प्रयास से लागू कराया गया।परिषद ने मुख्यमंत्री से मांग की कि जाति के आधार पर चल रहे संगठनों की मान्यता तत्काल समाप्त की जाए। उन पर प्रतिबंध लगाया जाए। जातिगत संगठनों से प्रदेश में वैमनस्यता पैदा हो रही है। परिषद ने जातिगत संगठनों पर शासन की फर्जी मान्यता का इस्तेमाल करने व राजनीति में लिप्त होने के गंभीर आरोप लगाया। बैठक में नंद किशोर त्रिपाठी, शक्ति प्रसाद भट्ट, अरुण पांडेय, चौधरी ओमवीर सिंह, राकेश प्रसाद ममगाईं, अनिल बांगा, गुड्डी मटूडा मौजूद थे। भूपाल सिंह, हर्षमोहन नेगी, इंद्रमोहन कोठारी, राकेश तिवारी, सरदार नरेश सिंह ने आनलाइन भागीदारी की।इस्तीफा देने वाले बर्खास्त होंगेबैठक में कहा गया कि भावावेश में परिषद के किसी पदाधिकारी या जनपदीय पदाधिकारी ने त्यागपत्र की पेशकश की तो उसे तत्काल प्रभाव से संविधान प्रदत्त शक्तियों के तहत बर्खास्त कर दिया जाए। नए पदाधिकारी का चुनाव कर लिया जाए। तय हुआ कि परिषद का कोई पदाधिकारी व सदस्य परिषद व अपने मातृ संगठन के अलावा अन्य महासंघ, संघ एसोसिएशन का सदस्य नहीं रह सकता। यदि कोई पदाधिकारी सदस्य जनरल ओबीसी या अन्य का सदस्य है तो तुरंत त्यागपत्र दे दे अन्यथा ऐसे कार्मिकों के विरुद्ध संविधान प्रदत्त कार्रवाई की जाएगी।फेडरेशन के किसी पदाधिकारी ने त्यागपत्र नहीं दियाउत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील दत्त कोठारी व प्रांतीय महामंत्री पूर्णानंद नौटियाल ने कहा कि फेडरेशन के किसी पदाधिकारी के त्यागपत्र की कोई लिखित सूचना नहीं है। यदि जिला स्तर पर एक दो पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है तो उनका अपने जिलों में व विभाग में कोई जनाधार नहीं है। ये उनका निजी निर्णय है। इससे फेडरेशन की एकता पर कोई असर नहीं पड़ता। जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन परिसंघों को कमजोर करने के लिए मीडिया में अनावश्यक भ्रम फैला रही है।फेडरेशन में 44 विभागों के प्रांतीय विभागीय घटक संघ शामिल हैं। अभी तक किसी भी प्रांतीय विभागीय घटक संघ ने कोई विरोध पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। फेडरेशन से प्रांतीय स्तर से बिना किसी निर्णय व निर्देश के फेडरेशन के कुछ सदस्य अपनी मर्जी से एसोसिएशन के सदस्य बने हैं।एसोसिएशन का पदाधिकारी बनते समय किसी भी सदस्य ने प्रांतीय स्तर से एक बार भी नहीं पूछा। इसीलिए आज फेडरेशन कमजोर करने के लिए बाहरी शक्तियों को बल मिला है। लेकिन वे सफल नहीं होंगे। फेडरेशन की मूल भावना समझने वाला प्रत्येक सदस्य फेडरेशन के साथ था, है और रहेगा। फेडरेशन की मूल भावना के विपरीत कमजोर करने का प्रयास करेगा उसके विरुद्ध सर्वसम्मति संविधान के अनुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।हम संगठन नहीं बनाएंगे तो बात कौन रखेगा : करम रामउत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करम राम ने कहा कि उनका संगठन जातिगत संगठन नहीं है। उनके वर्ग से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एससी एसटी कर्मचारियों का संगठन बनाया गया है। यदि वे संगठन बनाएंगे तो प्रमोशन में आरक्षण और सीधी भर्ती में आरक्षण के मुद्दे पर उनकी बात कौन संगठन रखेगा? करम राम राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की जातिगत संगठनों पर रोक लगाने और उनकी मान्यता समाप्त करने की मांग पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। उन्होंने कहा कि एससी एसटी संवैधानिक शब्द है। संविधान के अनुच्छेद 340, 341 व 342 में इसका उल्लेख है। उनका संगठन टम्टा, लोहिया या वाल्मिकी कर्मचारी के नाम से नहीं है, जो उसका विरोध किया जाए।अपने गिरेबां में झांके मान्यता रद्द कराने की मांग करने वालेउत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि उनका संगठन सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत है। यह एक सरकारी संस्था है। जो लोग जातिगत संगठन के नाम पर एसोसिएशन पर रोक लगाने और मान्यता समाप्त करने की मांग कर रहे हैं, वे पहले अपने गिरेबां में झांके। मान्यता समाप्त तो उन संगठनों की होनी चाहिए, जिनकी कमानरिटायर्ड कर्मचारियों ने संभाल रखी है।अब एसोसिएशन कार्मिक विभाग से मांग करेगी कि ऐसे संगठनों की मान्यता रद की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के साथ कोई नहीं है। उनमें से कुछ की राजनीति देहरादून में पोस्टिंग बनाए रखने तक सीमित हैं। कुछ लोग अटैचमेंट पर रोक के बावजूद सचिवालय में तैनात हैं। उन्हें सचिवालय से बाहर करने के लिए जल्द ही सचिवालय प्रशासन विभाग से मांग की जाएगी।



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