Independence Day 2020: Dehradun Sharma Family Six Members Fought Freedom Fight – Independence Day: देशभक्ति की मिसाल है दून का शर्मा परिवार, छह सदस्यों ने लड़ी आजादी की लड़ाई

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गौरव ममगाईं, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 15 Aug 2020 02:30 AM IST

स्व. शांति नारायण शर्मा का परिवार
– फोटो : अमर उजाला

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देशभक्ति का लहू जब रंगों में दौड़ रहा हो तो अंग्रेजों की क्या मजाल थी कि हमारे सामने टिक पाते। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और नौजवान, अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हर कोई शामिल होकर देश को आजाद कराने को बेताब था। ऐसे ही बलिदान और त्याग की मिसाल है देहरादून के नवादा में बसा शर्मा परिवार। शर्मा परिवार के छह सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। भले ही परिवार के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आज जीवित न हों, लेकिन उनका देशप्रेम युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। परिवार के स्वतंत्रता सेनानी स्व. शांति नारायण शर्मा के बेटे मुकेश नारायण शर्मा का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में जन्म लेना उनके लिए गौरव की बात है। कहा कि उनके पिता का जन्म 1917 में हुआ। वह 17 साल की उम्र में ही आंदोलन में शामिल हो गए थे।इसके लिए उन्होंने घर भी छोड़ दिया था। वह भगत सिंह के छोटे भाई कुलतार सिंह के साथ रहे, कई साल जेल में भी काटे। वर्ष 2011 में उनका निधन हुआ। बताया कि इसके अलावा उनके ताऊ विचित्र नारायण शर्मा और चाचा कांति नारायण शर्मा भी आजादी से पहले चार से पांच साल जेल में रहे। उन्होंने भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कहा कि पिता के भतीजे प्रेम नारायण शर्मा, वीरेंद्र नारायण शर्मा व सतेश्वर नारायण शर्मा भी परिवार से प्रेरित होकर 18 से 21 साल की उम्र में ही आंदोलन में कूद पड़े थे। सतेश्वर नारायण शर्मा एसजीआरआर नेहरुग्राम में प्रिंसिपल भी रहे। उनका निधन 2017 में हुआ। मुकेश नारायण शर्मा वर्तमान में उत्तराखंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण समिति के संगठन मंत्री हैं।
स्व. शांति नारायण शर्मा की पत्नी 90 वर्षीय प्रेमलता शर्मा खुद को बेहद गौरवशाली बताती हैं। उनका कहना है कि जिस परिवार ने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया हो, इससे बड़ा सौभाग्य नहीं हो सकता। प्रेमलता ने पुराने किस्से याद करते हुए कहा कि उनके पति स्वतंत्रता दिवस के दिन बेहद गर्व महसूस करते थे। वो कहा करते थे कि हमारा संघर्ष और त्याग देश को आजादी दिलाने में काम आया।वीरांगनाओं का ध्यान रखे सरकारमुकेश नारायण शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। उनके परिवारों ने भी कष्ट सहकर अपना योगदान दिया। कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरांगनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। अच्छा होता कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शासन उनकी मां को सम्मान देता।

सार
परिवार के छह सदस्यों ने आजादी की लड़ाई में निभाई अहम भूमिका   
भगत सिंह के छोटे भाई के साथ भी रहे शांति नारायण शर्मा, कई साल जेल में काटे  

विस्तार
देशभक्ति का लहू जब रंगों में दौड़ रहा हो तो अंग्रेजों की क्या मजाल थी कि हमारे सामने टिक पाते। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और नौजवान, अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हर कोई शामिल होकर देश को आजाद कराने को बेताब था। ऐसे ही बलिदान और त्याग की मिसाल है देहरादून के नवादा में बसा शर्मा परिवार। शर्मा परिवार के छह सदस्यों ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। भले ही परिवार के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आज जीवित न हों, लेकिन उनका देशप्रेम युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। 

परिवार के स्वतंत्रता सेनानी स्व. शांति नारायण शर्मा के बेटे मुकेश नारायण शर्मा का कहना है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में जन्म लेना उनके लिए गौरव की बात है। कहा कि उनके पिता का जन्म 1917 में हुआ। वह 17 साल की उम्र में ही आंदोलन में शामिल हो गए थे।

इसके लिए उन्होंने घर भी छोड़ दिया था। वह भगत सिंह के छोटे भाई कुलतार सिंह के साथ रहे, कई साल जेल में भी काटे। वर्ष 2011 में उनका निधन हुआ। बताया कि इसके अलावा उनके ताऊ विचित्र नारायण शर्मा और चाचा कांति नारायण शर्मा भी आजादी से पहले चार से पांच साल जेल में रहे। उन्होंने भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। कहा कि पिता के भतीजे प्रेम नारायण शर्मा, वीरेंद्र नारायण शर्मा व सतेश्वर नारायण शर्मा भी परिवार से प्रेरित होकर 18 से 21 साल की उम्र में ही आंदोलन में कूद पड़े थे। सतेश्वर नारायण शर्मा एसजीआरआर नेहरुग्राम में प्रिंसिपल भी रहे। उनका निधन 2017 में हुआ। मुकेश नारायण शर्मा वर्तमान में उत्तराखंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी कल्याण समिति के संगठन मंत्री हैं।

‘हमारा संघर्ष देश की आजादी में काम आया’

स्व. शांति नारायण शर्मा की पत्नी 90 वर्षीय प्रेमलता शर्मा खुद को बेहद गौरवशाली बताती हैं। उनका कहना है कि जिस परिवार ने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया हो, इससे बड़ा सौभाग्य नहीं हो सकता। प्रेमलता ने पुराने किस्से याद करते हुए कहा कि उनके पति स्वतंत्रता दिवस के दिन बेहद गर्व महसूस करते थे। वो कहा करते थे कि हमारा संघर्ष और त्याग देश को आजादी दिलाने में काम आया।वीरांगनाओं का ध्यान रखे सरकारमुकेश नारायण शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया। उनके परिवारों ने भी कष्ट सहकर अपना योगदान दिया। कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की वीरांगनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। अच्छा होता कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शासन उनकी मां को सम्मान देता।

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