Coronavirus Lockdown Uttarakhand: China Increased Rate Of Raw Material For Use In Medicine – Coronavirus: ‘दर्द’ देकर ‘मरहम’ की भारी कीमत वसूल रहा चीन, ऐसे मजबूत कर रहा अपनी अर्थव्यवस्था

0
46


राजेश शर्मा, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 19 Apr 2020 12:36 PM IST

ख़बर सुनें

ख़बर सुनें

पूरी दुनिया में फैले कोरोना के बीच भी चीन इस वैश्विक महामारी के बहाने भी मोटी कमाई कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में जुटा है। कोविड-19 से बचाव के लिए कारगर मानी जा रहीं दवाओं को बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल के बदले चीन मनमाना दाम वसूल रहा है। दवा निर्माण में जुटे फार्मा इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि बदली परिस्थितियों में इन दवाओं में काम आने वाले कच्चे माल की कीमतें चार से पांच गुना तक बढ़ गई हैं।इसके बावजूद इसे चीन से ही मंगाना मजबूरी है। हरिद्वार के सिडकुल में स्थित फार्मा कंपनियों में बड़े पैमाने पर सैनिटाइजर के अलावा अन्य ऐसी दवाएं बनाई जा रही हैं, जो कोरोना के प्रभाव से बचाने में कारगर बताई जाती हैं, लेकिन इनका उत्पादन अब बेहद महंगा हो गया है।फार्मा एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री अनिल शर्मा बताते हैं कि कोरोना का प्रभाव कम करने के लिए बनाए जाने वाली दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को एक्टिव फार्मा इनग्रेडिएंट (एपीआई) कहा जाता है। उन्होंने बताया कि देश में कोरोना के पाव पसारने के बाद एपीआई की कीमतों में पांच गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है।
इसका मुख्य कारण चीन की ओर से कीमतों में वृद्धि और बदली परिस्थितियों में लदान और ढुलाई महंगा होना भी है। उद्यमियों के सामने परेशानी यह है कि इस समय देश में इन दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है और एपीआई बेहद कम।दवाओं में इस्तेमाल होने वाला अधिकतर माल चीन से ही आता है, लिहाजा उद्यमियों को महंगी कीमत पर भी सामान खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च तक हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन नामक साल्ट 7800 रुपये प्रति किलो था, जो इस समय 55 हजार रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है।एजिथ्रोमाइसीन 6500 रुपये से बढ़कर करीब 15 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इवेर मेक्टिन 1400 रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये किलो तक पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में जरूरी दवाएं बेहद महंगी हो रही हैं। उद्यमियों ने सरकार से स्थानीय स्तर पर कीमतों पर नियंत्रण करने के साथ-साथ कच्चे माल की उपलब्धता भी कराने की मांग की है।

सार
कोरोना वायरस में सहायक दवाओं की निर्माण सामग्री के दामों में पांच गुना बढ़ोतरी
चीन से ही आयात होता है कच्चा माल, महंगा सामान खरीदना उद्यमियों की मजबूरी

विस्तार
पूरी दुनिया में फैले कोरोना के बीच भी चीन इस वैश्विक महामारी के बहाने भी मोटी कमाई कर अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में जुटा है। कोविड-19 से बचाव के लिए कारगर मानी जा रहीं दवाओं को बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल के बदले चीन मनमाना दाम वसूल रहा है। दवा निर्माण में जुटे फार्मा इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि बदली परिस्थितियों में इन दवाओं में काम आने वाले कच्चे माल की कीमतें चार से पांच गुना तक बढ़ गई हैं।

इसके बावजूद इसे चीन से ही मंगाना मजबूरी है। हरिद्वार के सिडकुल में स्थित फार्मा कंपनियों में बड़े पैमाने पर सैनिटाइजर के अलावा अन्य ऐसी दवाएं बनाई जा रही हैं, जो कोरोना के प्रभाव से बचाने में कारगर बताई जाती हैं, लेकिन इनका उत्पादन अब बेहद महंगा हो गया है।फार्मा एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री अनिल शर्मा बताते हैं कि कोरोना का प्रभाव कम करने के लिए बनाए जाने वाली दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को एक्टिव फार्मा इनग्रेडिएंट (एपीआई) कहा जाता है। उन्होंने बताया कि देश में कोरोना के पाव पसारने के बाद एपीआई की कीमतों में पांच गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है।

दान और ढुलाई भी महंगा

इसका मुख्य कारण चीन की ओर से कीमतों में वृद्धि और बदली परिस्थितियों में लदान और ढुलाई महंगा होना भी है। उद्यमियों के सामने परेशानी यह है कि इस समय देश में इन दवाओं की मांग बहुत ज्यादा है और एपीआई बेहद कम।दवाओं में इस्तेमाल होने वाला अधिकतर माल चीन से ही आता है, लिहाजा उद्यमियों को महंगी कीमत पर भी सामान खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि फरवरी-मार्च तक हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन नामक साल्ट 7800 रुपये प्रति किलो था, जो इस समय 55 हजार रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है।एजिथ्रोमाइसीन 6500 रुपये से बढ़कर करीब 15 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इवेर मेक्टिन 1400 रुपये से बढ़कर 60 हजार रुपये किलो तक पहुंच गया है। ऐसी स्थिति में जरूरी दवाएं बेहद महंगी हो रही हैं। उद्यमियों ने सरकार से स्थानीय स्तर पर कीमतों पर नियंत्रण करने के साथ-साथ कच्चे माल की उपलब्धता भी कराने की मांग की है।

आगे पढ़ें

दान और ढुलाई भी महंगा



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here