Corona In Uttarakhand : Delta Plus Patient Missing From Udham Singh Nagar – उत्तराखंड में कोरोना: स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही, ऊधमसिंह नगर से डेल्टा प्लस मरीज लापता

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सार
जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में आठ जुलाई को संजय सिंह नाम का एक युवक आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए पहुंचा था। बाहरी राज्य से आने पर उसकी डेल्टा प्लस जांच के लिए सैंपल लैब भेजा गया था।

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स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ऊधमसिंह नगर जिले में डेल्टा प्लस का मरीज लापता हो गया है। उसे खोजने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस की मदद ली है। मरीज का मोबाइल बंद होने से तीन दिन बाद भी उसका पता नहीं चल सका है। जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में आठ जुलाई को संजय सिंह नाम का एक युवक आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए पहुंचा था। बाहरी राज्य से आने पर उसकी डेल्टा प्लस जांच के लिए सैंपल लैब भेजा गया था। आठ जुलाई को कोरोना की जांच में उसके पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। वहीं, 10 अगस्त को डेल्टा की रिपोर्ट आने पर उसमें डेल्टा प्लस की पुष्टि हुई।उत्तराखंड में कोरोना: शुक्रवार को मिले 27 नए संक्रमित, एक की हुई मौत, छह जिलों में नहीं मिला नया मरीजयुवक के डेल्टा प्लस होने पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों में खलबली मच गई। गोपनीय स्तर से युवक के बारे में जानकारी जुटाई गई तो स्वास्थ्य कर्मियों के रिकॉर्ड में नाम और मोबाइल नंबर के अलावा कुछ नहीं था।युवक के बारे में जानकारी नहीं मिलने पर सीएमओ कार्यालय की ओर से एसएसपी को पत्र लिखा गया, जिसमें युवक को तलाश करने की मदद मांगी गई। पुलिस ने जांच शुरू की तो युवक का मोबाइल नंबर बंद पाया गया। युवक का मोबाइल नंबर मध्यप्रदेश का बताया जा रहा है। फिलहाल डेल्टा के मरीज का पता नहीं चलने से बीमारी के फैलने का खतरा बना हुआ है।
पुलिस मरीज तक पहुंचने के लिए मोबाइल नंबर की सीडीआर निकालने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल पर मरीज ने किसी से भी बात की होगी तो उसका नंबर आ जाएगा। उस नंबर के आधार पर मरीज के बारे में जानकारी मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेल्टा प्लस मरीज के बारे में पता लगाने के लिए कहा गया है। मरीज के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर वह स्विच ऑफ पाया गया। सीडीआर निकालकर उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मरीज का मोबाइल नंबर सर्विलांस से मध्यप्रदेश का मिला है, अगर किसी को जानकारी हो तो पुलिस से संपर्क कर सकता है। -मिथिलेश सिंह, एएसपी क्राइमसैंपल की रिपोर्ट आने पर एक युवक डेल्टा प्लस का मरीज पाया गया है। जिले में यह दूसरा युवक है जो डेल्टा प्लस मिला है। रिपोर्ट आने के बाद से युवक नहीं मिल रहा है। उसे ढूंढने के लिए पुलिस की मदद भी ली जा रही है।-डॉ. डीएस पंचपाल
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कोरोना की तीसरी लहर पर चिंता जाहिर की है। अपने फेसबुक पेज पर पूर्व सीएम ने लिखा कि केरल में संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। कर्नाटक में भी स्थिति खराब है। ऐसा लग रहा है, जैसे तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है। मगर राज्य सरकार को खतरे का अहसास होते हुए भी यहां उचित प्रबंध नहीं किए जा रहे हैं।इसके अलावा हरीश रावत ने पहाड़ में लगातार हो रही भूस्खलन की घटनाओं पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में भूस्खलन बहुत खतरनाक प्रवृत्ति के और बहुत बड़े हो रहे हैं। विशेष तौर पर सड़कों के कटाव के कारण जिसमें विस्फोटक और भारी मशीनों का उपयोग हो रहा है।किन्नौर में जो भूस्खलन हुआ है, वह हमारे लिए बड़ी चेतावनी है। हमारे यहां भी चारधाम यात्रा सुधार मार्ग में ऐसी स्थितियां कई स्थानों पर बनी हुई हैं, जहां पहाड़ दरक व टूट सकते हैं। संबंधित निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को कम से कम सड़क निर्माण के 8-10 साल तक इन पर गहरी नजर रखनी चाहिए। जहां ऐसी स्थितियां हैं, वहां पहले से ही बचाव के उपाय किए जाने चाहिए।

विस्तार

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। ऊधमसिंह नगर जिले में डेल्टा प्लस का मरीज लापता हो गया है। उसे खोजने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस की मदद ली है। मरीज का मोबाइल बंद होने से तीन दिन बाद भी उसका पता नहीं चल सका है। 

जवाहर लाल नेहरू अस्पताल में आठ जुलाई को संजय सिंह नाम का एक युवक आरटीपीसीआर जांच कराने के लिए पहुंचा था। बाहरी राज्य से आने पर उसकी डेल्टा प्लस जांच के लिए सैंपल लैब भेजा गया था। आठ जुलाई को कोरोना की जांच में उसके पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई थी। वहीं, 10 अगस्त को डेल्टा की रिपोर्ट आने पर उसमें डेल्टा प्लस की पुष्टि हुई।

उत्तराखंड में कोरोना: शुक्रवार को मिले 27 नए संक्रमित, एक की हुई मौत, छह जिलों में नहीं मिला नया मरीज
युवक के डेल्टा प्लस होने पर स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों में खलबली मच गई। गोपनीय स्तर से युवक के बारे में जानकारी जुटाई गई तो स्वास्थ्य कर्मियों के रिकॉर्ड में नाम और मोबाइल नंबर के अलावा कुछ नहीं था।
युवक के बारे में जानकारी नहीं मिलने पर सीएमओ कार्यालय की ओर से एसएसपी को पत्र लिखा गया, जिसमें युवक को तलाश करने की मदद मांगी गई। पुलिस ने जांच शुरू की तो युवक का मोबाइल नंबर बंद पाया गया। युवक का मोबाइल नंबर मध्यप्रदेश का बताया जा रहा है। फिलहाल डेल्टा के मरीज का पता नहीं चलने से बीमारी के फैलने का खतरा बना हुआ है।

सीडीआर से मरीज तक पहुंचने का प्रयास

पुलिस मरीज तक पहुंचने के लिए मोबाइल नंबर की सीडीआर निकालने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल पर मरीज ने किसी से भी बात की होगी तो उसका नंबर आ जाएगा। उस नंबर के आधार पर मरीज के बारे में जानकारी मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेल्टा प्लस मरीज के बारे में पता लगाने के लिए कहा गया है। मरीज के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर वह स्विच ऑफ पाया गया। सीडीआर निकालकर उसका पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मरीज का मोबाइल नंबर सर्विलांस से मध्यप्रदेश का मिला है, अगर किसी को जानकारी हो तो पुलिस से संपर्क कर सकता है। -मिथिलेश सिंह, एएसपी क्राइमसैंपल की रिपोर्ट आने पर एक युवक डेल्टा प्लस का मरीज पाया गया है। जिले में यह दूसरा युवक है जो डेल्टा प्लस मिला है। रिपोर्ट आने के बाद से युवक नहीं मिल रहा है। उसे ढूंढने के लिए पुलिस की मदद भी ली जा रही है।-डॉ. डीएस पंचपाल

पूर्व सीएम ने कोरोना की तीसरी लहर को लेकर चेताया

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कोरोना की तीसरी लहर पर चिंता जाहिर की है। अपने फेसबुक पेज पर पूर्व सीएम ने लिखा कि केरल में संक्रमण बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। कर्नाटक में भी स्थिति खराब है। ऐसा लग रहा है, जैसे तीसरी लहर कभी भी दस्तक दे सकती है। मगर राज्य सरकार को खतरे का अहसास होते हुए भी यहां उचित प्रबंध नहीं किए जा रहे हैं।इसके अलावा हरीश रावत ने पहाड़ में लगातार हो रही भूस्खलन की घटनाओं पर भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में भूस्खलन बहुत खतरनाक प्रवृत्ति के और बहुत बड़े हो रहे हैं। विशेष तौर पर सड़कों के कटाव के कारण जिसमें विस्फोटक और भारी मशीनों का उपयोग हो रहा है।किन्नौर में जो भूस्खलन हुआ है, वह हमारे लिए बड़ी चेतावनी है। हमारे यहां भी चारधाम यात्रा सुधार मार्ग में ऐसी स्थितियां कई स्थानों पर बनी हुई हैं, जहां पहाड़ दरक व टूट सकते हैं। संबंधित निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को कम से कम सड़क निर्माण के 8-10 साल तक इन पर गहरी नजर रखनी चाहिए। जहां ऐसी स्थितियां हैं, वहां पहले से ही बचाव के उपाय किए जाने चाहिए।

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सीडीआर से मरीज तक पहुंचने का प्रयास



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